Wednesday, May 1, 2013

हमने अपने दिल की बात क्या कही उनसे,
और वो कहने लगे कि चलो नयी दुनिया बसाते है .....माया विश्वकर्मा 
आज की मेरी ये कविता "श्री सरबजीत सिंह जी" को समर्पित .....

ऐ जिन्दगी ऐसी जुदाई ना देना !
कि अपने वतन की मिट्टी नसीब ना हो मरने के लिए !!
कैंसे काटी मैंने जिन्दगी यहाँ अपने वतन को तरसते हुए !!
काश एक बार ही देख लिया होता तुझे धरती माता !!
जीना हो जाता सफल इस जनम के लिए !! .......माया विश्वकर्मा